Flood in bihar is a yearly feature .specially in seemanchal ,after effects are so devastating that a population of 1 crore forced to displaced . what is behind the blanket of flood ? बिहार में पिछले सौ साल का रिकॉर्ड तोड़ने वाली बाढ़ 2017 ने करोड़ों लोगों को जीते जी मार दिया है बदबूदार तेल्ये बाढ़ के पानी ने हजारों हेकटियर फसल को बर्बाद कर दिया है । एक तरफ 500 लोगों के पानी मे डूबने की बात सरकार कर रही है वहीं जमीनी हकीकत कुछ और है , स्थानीय लोगों और कल्याणकारी संगठन गैर-स्थानीय स्वयंसेवी संगठन अपनी रिपोर्ट मे सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं ,उनका दावा है की अब भी हजारों इंसान और मवेशी गाद मे दबे हुये हैं जिनकी लाशें पानी के कम होने पर सामने आ रही हैं कई लोग बेह कर जाने कहाँ गए अक्सर घरों के एक दो लोग लापता हैं । दूषित पानी होने के कारण इस आपदा क्षेत्र में अगले कुछ महीनों के लिए फसल की कोई उम्मीद नहीं है।हैरत इस बात पर है की बिहार सरकार इस बाढ़ को भी एक रूटीन की बाढ़ बताने पर तुली है और राहत और बचाव के नाम पर ढुलमुल नीति पे काम कर रही है । 30 अगस्त 2017 :लखनऊ मे आयोजित एक प्रेस वार्ता मे मुसलिम पोलिटिकल काउंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ तस्लीम अहमद रहमनी ने बिहार दौरे से वापसी पर ये खुलासा किया । बिहार के सीमांचल मे बाढ़ के कारण पैदा हुई भयावह स्थिति का जायजा लेने काउंसिल का परतिनिधि मण्डल गत 24 अगस्त 2017 को दिल्ली से बड़ी मात्रा मे दवाएं ले कर सीमांचल गया था परतिनिधि मण्डल ने पुर्णिया अररया किशनगंज कटिहार जिलों के सुदूर देहातों का दौरा कर के वहाँ सक्रिये एन जी ओ एवं वालेंटियर के बीच दवाएं बांटी ताकि वो लाभान्वितों तक पोहंचा दें , राज्य सरकार के अधिकारियों और किशन गंज के सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी से मिल कर बाढ़ की त्रासदी के मूल कारणो का पता लगाने की कोशिश की । इस र्क्म मे छान बीन करने और स्थिति का गहन आध्यन करने पर ये बात सामने आई कि ये त्रासदी कोई प्रकीर्तिक आपदा नहीं है बल्कि राज्य सरकार की आपराधिक अनदेखी का परिणाम है . प्रेस वार्ता मे डॉ रहमनी ने आरोप लगाया की सरकार को आने वाली बाढ़ का पहले से पता था फिर भी बाढ़ से बचाव का कोई परबंधन नहीं किया गया । स्थानिये पत्रकारों ,राहत कार्य मे जुटी स्वेयंसेवी संस्थाओं ,सांसद महोदय के बार बार मांग करने के बाद भी आपदा प्रभावित छेत्रों को सेना के हवाले नहीं किया गया । तीन दिन तक किश्ती या हेलिकॉप्टर की व्यवस्था नहीं की गई 11 से 15 अगस्त तक पानी बढ़ता रहा और मुख्यमंत्री निष्करिए बैठे रहे ,राष्ट्रिए मीडिया भी सोशल मेडिया द्वारा ध्यान आकृष्ट करने पर हरकत मे आया ,एक क्रोड से अधिक लोग जल समाधि की अवस्था मे बैठे रहे और हजारों लोग और लाखों मवेशी देखते देखते बेह गए ,सरकार आज भी अपनी लगी बंधी रिपोर्ट पर काएम है ।काउंसिल पहले दिन से ही स्थिति पर नजर बनाए हुये थी ,काउंसिल की ओर से शुरू मे ही ये मांग की गई थी की इस बाढ़ को राष्ट्रिए आपदा घोषित किया जाये और पूरे छेत्र को सेना के हवाले किया जाये ताकि राहत और बचाओ का कार्य युद्ध स्तर पर हो सके लेकिन बिहार सरकार एवं केंद्र सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया । बाढ़ आने के ग्यारवे दिन प्रधान मंत्री हवाई दौरे पे बिहार आए और राज्य सरकार के तीन हजार पाँच सौ क्रोड की मांग के एवज केवल पाँच सौ क्रोड रुपए देने की घोषणा की . राज्य सरकार के अधिकारी बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी पूछने पर ये नहीं बता पा रहे की राहत एवं पुनर्वास मे कितनी राशि की जरूरत पड़े गी और ये काम कितने दिन में पूरा होगा ? इधर राज्य सरकार इस आपदा से निमटने के लिए फंड की कमी का रोना रो कर हाथ खड़े कर चुकी है और पूरे प्रभावित छेत्र मे स्वं सेवी संस्थाएं ही राहत एवं पुनर्वास के कार्य मे लगी हैं . बिहार सरकार का रवय्या आश्चर्यजनक तो है ही साथ ही चिंता जनक है , बाढ़ से पूर्व किसी तय्यारी के न करने से ये बात साफ जाहिर है की सरकार की नियत साफ नहीं थी और बाढ़ को अपने भयवह रूप के साथ लाया गया , डॉ रहमनी ने सरकारी दावे को झूठ करार दिया की नेपाल सरकार ने अचानक पानी छोड़ा है कियुंकी कोसी बराज का सारा र्प्बंधन दोनों देशों के बीच हुई संधि के अनुसार भारत सरकार के जिम्मे है । कोसी बराज के फाटक की चाबी बिहार सरकार के पास रहती है इस् से पता चलता है की कोसी बराज के फाटक बिहार सरकार ने खोले और जनता मे भरम फैलाया की सारा कुसूर नेपाल सरकार का है । स्थानिये प्रशासन ने फाटक खोलने से पहले अपने लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना तो दूर कोई अलर्ट या अलार्म जारी नहीं किया , डॉ रहमनी ने कहा की ऐसा लगता है की बिहार के सीमांचल मे मुस्लिम आबादी जियादा होने के कारण मुस्लिम विरोधी राज्य एवं केंद्र सरकारों ने प्रकृतिक आपदा की आड़ मे गरीब मुसलमानो को बे घर और बर्बाद करने की रण नीति अपनाई है । यही सुलूक बंगाल और असम के मुसलमानो के साथ भी किया जा रहा है जिसके कारण तीन क्रोड मुसलमान बर्बाद हो रहे हैं .वहाँ मौजूद एम पी सी आई की जेन्रल सेक्रेटरी परसिद्ध पत्रकार एवं सीमांचल मीडिया मंच की अध्यक्ष श्रीमति तसनीम कौसर सईद ने कहा की सीमांचल के बाढ़ परभावित लोगों को राहत पहुंचाने उनके पुनर्वास और भविष्य में बाढ़ पूर्व तयारी के नाम पर 2008 से अब तक 470 मिलयन डालर की राशि विश्व बैंक से राज्य सरकार को मिल चुकी है ,ये पूरी राशि सरकार से संबन्धित मंत्रालय के द्वारा खर्च किए जाने के बजाए बिहार आपदा परबंधन एवं पुनर्वास सोसएटी नामक एक नई संस्था रीजिस्टर कर के उसको सौंप दी गई जिसके अध्यक्ष खुद मुख्य मंत्री नितीश कुमार हैं । केवल सीमांचल के पाँच जिलों पुर्णिया अररया कटिहार सुपौल मधेपुरा के लिए थी राशि . पुर्णिया कमिश्नर के सचिव श्री पासवान से पूछने पर उनहों ने ऐसी किसी सोसिएटी के बारे में पता होने से साफ इंकार कर दिया । उनका कहना था कि वो बिहार आपदा परबंधन एवं पुनर्वास सोसाइटी का नाम पहली बार सुन रहे हैं . विडम्बना ये है कि राज्य सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों की मिलीभगत से इतनी बड़ी राशि खुर्दबुर्द कर दी गई . एम पी सी आई अध्यक्ष डॉ रहमानी ने पत्रकारों को बताया कि मुस्लिम पोलिटिकल काउंसिल जल्द ही न्यायालय जाये गा और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करे गा ।